(प्रतीकात्मक तस्वीर)
CJP protest देश में युवाओं के सोशल मीडिया आधारित संगठन Cockroach Janta Party (CJP) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार CJP का निशाना है – मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर संगठन ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। आइए जानते हैं CJP है क्या, यह किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही है और आगे क्या होने वाला है।
क्या है Cockroach Janta Party (CJP)?
CJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह मई 2026 में सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक युवा आंदोलन है। इसकी शुरुआत तब हुई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं के एक वर्ग के लिए “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका इशारा फर्जी डिग्री हासिल करने वालों की ओर था, लेकिन इस टिप्पणी ने देशभर के युवाओं में गुस्सा भड़का दिया, जिससे CJP का जन्म हुआ।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह संगठन जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक और CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग गड़बड़ी को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर चुका है। उस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसे CJP की बड़ी जीत माना गया।
इस बार मुद्दा क्या है?
इस बार CJP का निशाना चुनाव आयोग और खासतौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूचियों के “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन” (SIR) के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार को “भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा” तक करार दिया।
इस विवाद को और हवा तब मिली जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने बीते करीब 10 महीनों में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मतदाता डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि चुनाव आयोग ने इसे संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा है कि सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
CJP की प्रमुख मांगें
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा दें
- उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए
- SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए
- मतदाता सूची को जनवरी 2025 की स्थिति में बहाल किया जाए
- SIR से जुड़ी सभी कार्रवाइयों की जांच के लिए एक स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच आयोग गठित किया जाए
प्रदर्शन कहां-कहां हो रहे हैं?
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि अगर ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते, तो संगठन 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से मुंबई से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगा, जिसे बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। इससे पहले संगठन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पटना जैसे शहरों में भी छिटपुट प्रदर्शन कर चुका है।
विपक्ष भी हुआ मुखर, कांग्रेस ने भी उठाई मांग
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी CJP की मांग का समर्थन करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी लंबे समय से “वोट चोरी” का आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने देशभर में राज्य चुनाव कार्यालयों पर प्रदर्शन मार्च निकालने का ऐलान भी किया है, जिसमें ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, उन्हें पद से हटाने और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच की मांग रखी गई है।
चुनाव आयोग और सत्ताधारी पार्टी का पक्ष
चुनाव आयोग ने पक्षपात के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय रखना एक सामान्य और वैध प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर चुनाव आयोग के खिलाफ जानबूझकर बदनामी अभियान चलाने का आरोप लगाया है।
निष्कर्ष
Cockroach Janta Party एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है, इस बार निशाने पर चुनाव आयोग है। संगठन का दावा है कि यह लड़ाई लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए है, जबकि सरकार और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आंदोलन आने वाले दिनों में देश की सियासत को और गर्माने वाला साबित हो सकता है।
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