CJP का School Thik Karo आंदोलन: अब तक कितने स्कूलों का हुआ ऑडिट?

🔄 31 August 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 186 views
CJP का School Thik Karo आंदोलन: अब तक कितने स्कूलों का हुआ ऑडिट?

School Thik Karo : Cockroach Janta Party (CJP) के संयोजक अभिजीत डिपके इन दिनों अपने ‘School Thik Karo’ अभियान को लेकर सुर्खियों में हैं। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करने के लिए शुरू किया गया यह अभियान अब महाराष्ट्र के कई जिलों तक पहुंच चुका है।

अभियान की शुरुआत कहां से हुई

15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अभिजीत डिपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी (हिंगोली जिला, महाराष्ट्र) पहुंचे थे। वहां झंडारोहण के बाद उन्होंने स्थानीय जिला परिषद स्कूल का दौरा किया, जहां उन्हें टॉयलेट में पानी की सप्लाई न होना, टूटी खिड़कियां और बच्चों के लिए पर्याप्त बेंच न होने जैसी खामियां मिलीं। इसी दौरे के साथ उन्होंने पूरे देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति जांचने का ऐलान किया।

अब तक कितने स्कूल कवर हो चुके हैं

अभियान की शुरुआत के बाद से डिपके और उनकी टीम कई स्कूलों का दौरा कर चुकी है:

  • हिंगोली: संतुक पिंपरी की जिला परिषद स्कूल, जहां से अभियान शुरू हुआ।
  • लातूर: औसा तालुका के उजनी, एकंबी और औसा गांवों के जिला परिषद स्कूल, साथ ही लातूर की नगर निगम स्कूल नंबर 26 (लेबर कॉलोनी)।
  • छत्रपति संभाजीनगर: यहां भी टीम ने स्कूलों को लेकर सवाल उठाए और सरकारी खर्च पर सवाल खड़े किए।

CJP का दावा है कि वह एक 10-पॉइंट चेकलिस्ट के आधार पर हर स्कूल का सोशल ऑडिट कर रही है, जिसमें पीने का पानी, साफ-सुथरे टॉयलेट, बिजली, बिल्डिंग की सुरक्षा, मिड-डे मील, दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं जैसे पहलू शामिल हैं। पार्टी ने आम लोगों से भी अपने इलाके के स्कूलों का ऑडिट कर डेटा भेजने की अपील की है, ताकि यह अभियान महाराष्ट्र से आगे पूरे देश में फैलाया जा सके।

जमीन पर दिखने लगा असर

हिंगोली के जिस स्कूल से अभियान शुरू हुआ था, वहां कुछ ही दिनों में बदलाव देखने को मिला। स्कूल की पेंटिंग हुई और बच्चों को पहली बार बेंच पर बैठकर पढ़ाई करने का मौका मिला। डिपके ने इसे अपनी जिंदगी के सबसे खुशी के पलों में से एक बताया।

विवाद भी साथ-साथ

यह अभियान सिर्फ तारीफ ही नहीं, विवादों में भी घिरा है। लातूर के औसा इलाके की एक उर्दू स्कूल में दौरे के दौरान एक शिक्षिका की शिकायत पर डिपके और उनकी टीम के खिलाफ FIR दर्ज हुई। आरोप है कि टीम बिना अनुमति स्कूल परिसर में घुसी और क्लास के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग की। कुछ आलोचकों का कहना है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को सरकारी स्कूलों में जाकर खुद ही “इंस्पेक्टर” बनने का अधिकार किसने दिया।

आगे की योजना

CJP ने साफ किया है कि यह अभियान सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी की योजना है कि आगे चलकर सरकारी अस्पतालों की हालत पर भी इसी तरह का सोशल ऑडिट अभियान चलाया जाए। साथ ही, निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर भी लगाम लगाने की मांग की जा रही है।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

संबंधित खबरें भी पढ़ें: CJP का पूरा परिचय और पृष्ठभूमि

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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