नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के अनुसार अब तक 616 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। इनमें दर्जनों अमेरिकी नागरिकों समेत कई देशों के विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। करीब 2,301 लोग घायल होकर इलाजरत हैं।
अब तक क्या हुआ?
नेपाल के नुवाकोट, रसुवा और चितवन जिलों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। चितवन जिले से अकेले 186 से ज्यादा शव बरामद हो चुके हैं। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार लापता लोगों में करीब एक चौथाई यानी 500 से ज्यादा विदेशी नागरिक हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी के अनुसार करीब 90,000 से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। बचाव दल अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा क्षेत्र तक क्षतिग्रस्त सड़कों की वजह से पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं।
नई झील बनने से खतरा बरकरार
बचाव अधिकारियों ने हवाई सर्वेक्षण में एक नई झील बनने की जानकारी दी है, जो प्रभावित क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में स्थित है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यह झील भी टूट सकती है, जिससे एक और बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इस वजह से प्रशासन आने वाले दिनों में और बारिश की चेतावनी के बीच स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
भारत ने अब तक कितनी मदद पहुंचाई?
भारत ने इस आपदा में नेपाल का बड़ा सहयोगी बनकर मदद पहुंचाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता (HADR) और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। यह राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से भेजी गई, जिसमें अस्थायी शिविर, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस आपदा में हुई जनहानि बेहद दुखद है और भारत सरकार इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की गई है, क्योंकि बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों में भी पड़ सकता है। इसके अलावा NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमों को भी सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट पर रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों के अनुसार आगे C-17 और C-130 जैसे बड़े सैन्य विमानों से और राहत सामग्री भेजी जाएगी, साथ ही बचाव और रेस्क्यू कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर भी तैनात किए जाएंगे। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत और विदेश मंत्री जयशंकर का इस सहयोग के लिए आभार जताया है।
भारतीय नागरिकों की स्थिति
रिपोर्ट्स के अनुसार लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें से कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है।
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Leave a Reply