Ujjain Khade hanuman की मूर्ति क्यों नहीं हटी
Ujjain Khade hanuman उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने की कोशिश की, लेकिन भारी मशीनरी लगाने के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, मामला वास्तव में सामने आया है, लेकिन इसके पीछे की वजह को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और तथ्यात्मक जानकारी में अंतर है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर को स्थानांतरित करने की योजना
कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। इसी की जद में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा है। प्रशासन और नगर निगम की ओर से मंदिर को हटाकर प्रतिमा को दूसरी जगह सुरक्षित रूप से स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
रिपोर्टों के अनुसार मंदिर के बाहरी ढांचे का काफी हिस्सा हटाया जा चुका है, लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को हटाने में सफलता नहीं मिली।
कई कोशिशों के बाद भी नहीं हिली प्रतिमा
प्रतिमा को हटाने के लिए क्रेन और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा को उसके स्थान से हटाया नहीं जा सका।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक करीब चार प्रयास असफल रहे हैं। अब भारी मशीनरी से दोबारा जोर लगाने के बजाय विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी जांच पर जोर दिया जा रहा है।
आखिर मूर्ति क्यों नहीं हटी?
यही इस पूरी घटना का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
विशेषज्ञों की चिंता यह है कि प्राचीन प्रतिमा को अचानक भारी बल से खींचने या उठाने पर उसमें दरार पड़ सकती है या प्रतिमा खंडित हो सकती है। इसलिए प्रशासन अब प्रतिमा की संरचना और उसके आधार की जांच कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यानी अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि मूर्ति किसी अलौकिक शक्ति के कारण नहीं हटी। वैज्ञानिक और तकनीकी वजहों की जांच अभी जारी है।
प्रतिमा की उम्र को लेकर भी चर्चा
इस प्रतिमा की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में मंदिर को करीब 160 से 170 साल पुराना बताया गया है, जबकि एक पुरातत्व विशेषज्ञ ने प्रतिमा के पत्थर और शैली के आधार पर इसे इससे भी अधिक प्राचीन होने की संभावना जताई है।
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमा मालवा के बेसाल्ट पत्थर से बनी हो सकती है और इसकी वास्तविक उम्र निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वानरों का वीडियो
इस घटना के बीच मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में वानरों के पहुंचने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रिपोर्टों में 50 से अधिक वानरों के वहां मौजूद रहने की बात कही गई है।
इस वजह से श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक भावनाएं और चर्चा और भी बढ़ गईं। हालांकि वानरों के पहुंचने को प्रतिमा के न हिलने से जोड़ना आस्था और विश्वास का विषय है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं।
फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल प्रतिमा को टेंट/कैनोपी के नीचे सुरक्षित रखा गया है और आसपास बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन अब विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल खबर का सही निष्कर्ष यह है कि:
“उज्जैन में खड़े हनुमान की प्राचीन प्रतिमा को हटाने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली। प्रशासन ने भारी मशीनरी से आगे की कार्रवाई रोककर विशेषज्ञों की तकनीकी जांच का रास्ता अपनाया है। इसे चमत्कार मानना श्रद्धालुओं की आस्था है, जबकि प्रतिमा के न हटने की वास्तविक तकनीकी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।”
Leave a Reply