Raghav Chadha Delhi Voter List दिल्ली की मतदाता सूची में भाजपा सांसद राघव चड्ढा का नाम जोड़े जाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से उनका नाम हटने के कुछ ही दिनों बाद दिल्ली के राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की सूची में उनका नाम सामने आया, जिसके बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने सवाल खड़े किए हैं।
चुनाव आयोग ने बताई पूरी प्रक्रिया
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, राघव चड्ढा ने 26 अगस्त को फॉर्म-6 के जरिए राजिंदर नगर की मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया था। निर्धारित सात दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने 2 सितंबर को इस आवेदन को मंजूरी दी।
CEO कार्यालय के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 के तहत कोई भी पात्र नागरिक फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में शामिल होने का आवेदन कर सकता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 आवेदन मंजूर होते ही संबंधित व्यक्ति का नाम तुरंत डेटाबेस में दिखने लगता है और उसे ड्राफ्ट सूची के अंतिम क्रमांक के बाद जोड़ दिया जाता है।
AAP ने उठाए सवाल, ‘पिछले दरवाजे’ से एंट्री का आरोप
आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की सफाई को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि चड्ढा का नाम ‘पिछले दरवाजे’ से सूची में जोड़ा गया। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने दावा किया कि 31 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद 1 से 7 सितंबर के बीच राजिंदर नगर क्षेत्र में मिले किसी भी फॉर्म-6 आवेदन में चड्ढा का नाम नहीं था।
AAP ने चुनाव आयोग से मांग की है कि चड्ढा का फॉर्म-6 आवेदन सार्वजनिक किया जाए ताकि उस पर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकें। पार्टी का कहना है कि फॉर्म-8 (वोट ट्रांसफर) इस मामले में लागू नहीं होता क्योंकि पंजाब से दिल्ली वोट ट्रांसफर की कोई प्रक्रिया नहीं हुई, इसलिए सिर्फ फॉर्म-6 के जरिए ही यह एंट्री संभव है — और आयोग को इसका ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया 16 जून से 31 अगस्त के बीच एक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के चलते स्थगित थी। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में भी चड्ढा का नाम शामिल नहीं था, जिसके चलते बाद में हुई एंट्री की टाइमिंग को लेकर सवाल उठे हैं।
अब तक स्पष्ट नहीं हुए कुछ बिंदु
यह मामला अभी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। AAP के आरोप अभी तक अपुष्ट हैं और चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया है। दोनों पक्षों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर अगर फॉर्म-6 आवेदन को लेकर पारदर्शिता की मांग पूरी नहीं होती।
निष्कर्ष
राघव चड्ढा के दिल्ली मतदाता सूची में नाम जुड़ने का मामला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद AAP का पलटवार जारी है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।
Leave a Reply