PM Modi Jacket Controversy: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोशाक को लेकर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की जैकेट में लगे तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर (सजावटी रुमाल) के रंगों के क्रम पर सवाल उठाए हैं।
PM Modi Jacket Controversy: आखिर विवाद की वजह क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपनी जैकेट की जेब में तीन रंगों वाला एक सजावटी रुमाल लगाया था। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि इसमें हरा, सफेद और केसरिया रंग जिस क्रम में दिखाई दे रहे थे, वह भारतीय तिरंगे के तय क्रम से अलग था।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का तीखा तंज
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री के पहनावे का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'लगता है साहब ने उर्दू में तिरंगा पहना है। या फिर भारत की जगह आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं।' उनका इशारा इस बात की तरफ था कि रंगों का क्रम पलटा हुआ नजर आ रहा था।

सुप्रिया श्रीनेत ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इसी मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री के पहनावे पर निशाना साधा और पार्टी के हमले को और हवा दी। सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने कहा कि तिरंगे को प्रदर्शित करने वाला यह रुमाल सही क्रम में नहीं था, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया।
तिरंगे का सही क्रम क्या होता है?
भारतीय ध्वज संहिता के मुताबिक तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग होना अनिवार्य है। ध्वज का आकार आयताकार होना चाहिए और लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना जरूरी है। हालांकि जैकेट के पॉकेट स्क्वायर जैसे सजावटी परिधान पर यह संहिता सीधे तौर पर लागू होती है या नहीं, इसे लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
यह विवाद ऐसे समय हुआ जब कांग्रेस पहले से ही आक्रामक थी
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब कांग्रेस पहले से ही प्रधानमंत्री की एक अन्य टिप्पणी को लेकर उन पर हमलावर थी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने पहले अपने विरोधियों को 'शहरी नक्सल' कहा और अब उन्हें 'दिमागी नक्सल' कह रहे हैं, जिसे पार्टी ने उनकी हताशा का संकेत बताया।
इस विवाद से जुड़ी और जानकारी आप Hindi Oneindia और Dainik Tribune पर पढ़ सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी अन्य रिपोर्ट के लिए हमारी 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह स्टोरी भी पढ़ें।
राजनीतिक बहस और जनता की राय
इस तरह के मुद्दे अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बनते हैं, जहां आम जनता भी अपनी-अपनी राय रखती है। कुछ यूजर्स इसे गंभीर मुद्दा मानते हैं तो कुछ इसे सिर्फ राजनीतिक नोकझोंक का हिस्सा बताते हैं। बहरहाल, इस मामले पर अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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