Delhi Missing Children Case: इस साल जनवरी 2026 में दिल्ली से जुड़ी एक खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था – दावा किया गया कि सिर्फ 15 से 27 दिनों के भीतर दिल्ली से 800 से ज्यादा लोग, खासकर बच्चे और महिलाएं, अचानक गायब हो गए। सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा तेजी से वायरल हुआ और लोगों में डर और गुस्सा दोनों फैल गया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर दिल्ली पुलिस और सरकार इस पर चुप क्यों हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले की असली सच्चाई क्या थी और अब तक इस पर क्या कार्रवाई हुई है।
Delhi Missing Children Case: वायरल दावे में कितनी सच्चाई थी?
पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 के पहले 27 दिनों में दिल्ली से वाकई 807 लोग लापता हुए थे, जिनमें 137 नाबालिग शामिल थे। हालांकि इनमें से 235 लोगों को पुलिस ने उसी दौरान ट्रेस भी कर लिया था। फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंकड़ा दिल्ली जैसे बड़े महानगर के लिए सालाना औसत के अनुरूप ही था, न कि कोई अचानक आई नई आपदा। पिछले 10 सालों के आंकड़े देखें तो दिल्ली से लापता हुए करीब 77 प्रतिशत लोग वापस मिल चुके हैं।
पुलिस ने क्यों बताया इसे अफवाह?
दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इस वायरल दावे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया और कहा कि यह सामान्य वार्षिक आंकड़ों को सनसनीखेज तरीके से पेश किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान बॉलीवुड फिल्म 'मर्दानी 3' रिलीज हुई थी, जिसका विषय भी लापता बच्चों और मानव तस्करी से जुड़ा था। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि वायरल आंकड़ों का इस्तेमाल फिल्म के प्रमोशन के तौर पर भी किया गया, जिससे पूरा मामला और उलझ गया। यही वजह रही कि पुलिस के शुरुआती जवाब को लोगों ने चुप्पी या टालमटोल के तौर पर देखा।

सरकार और अदालतों ने आखिर क्या एक्शन लिया?
हालांकि जनता के गुस्से और सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब मांगा। इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक जनहित याचिका दाखिल हुई, जिसमें 'राइट टू बी फाउंड' (मिलने का अधिकार) को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का अहम हिस्सा बताया गया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती – तुरंत FIR और जवाबदेही तय
मामले को और गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, और गोल्डन आवर में लापरवाही होने पर संबंधित राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को जवाबदेह ठहराया जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लापता बच्चों और संदिग्ध मानव तस्करी के मामलों को चार महीने का इंतजार किए बिना सीधे विशेष एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंपा जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होनी है।
जमीनी स्तर पर क्या हुआ – ऑपरेशन मिलाप के तहत बड़ी कार्रवाई
कोर्ट और NHRC के दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने 'ऑपरेशन मिलाप' के तहत लापता लोगों को खोजने का अभियान और तेज कर दिया। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ही जुलाई 2026 के एक महीने में पुलिस ने 43 नाबालिगों समेत कुल 124 लापता या अगवा लोगों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया। इनमें कुछ लोग तो वर्षों पहले, यानी 2020-21 से लापता थे। इसके अलावा अगस्त 2026 में भी क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने कई नाबालिगों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों से मिलवाया है।
निष्कर्ष: चुप्पी नहीं, संस्थागत जवाबदेही की धीमी प्रक्रिया
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सरकार या पुलिस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली। शुरुआती दौर में जरूर पुलिस का रवैया बचावात्मक और आंकड़ों को खारिज करने वाला रहा, लेकिन इसके बाद NHRC, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से मामले में संस्थागत जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई। जमीनी स्तर पर ऑपरेशन मिलाप जैसे अभियानों के जरिए सैकड़ों लापता बच्चों और वयस्कों को उनके परिवारों तक पहुंचाया भी गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी भी चल रहा है और 5 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में आगे की दिशा तय होगी।
इस मामले से जुड़े विस्तृत तथ्य आप आजतक के फैक्ट-चेक और ETV Bharat पर पढ़ सकते हैं। दिल्ली से जुड़ी अन्य खबरों के लिए हमारी जंतर-मंतर छात्र आंदोलन रिपोर्ट भी पढ़ें।
बाल सुरक्षा से जुड़े करियर और जागरूकता
लापता बच्चों को खोजने और मानव तस्करी रोकने के लिए देशभर में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स में सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसलर और पुलिस कर्मियों की लगातार जरूरत बनी रहती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे राज्य पुलिस विभाग और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली भर्तियों पर नजर बनाए रखें।
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