अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर दिए गए बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कई मौकों पर दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही इस रणनीतिक जलमार्ग को “अमेरिकी क्षेत्र” घोषित कर देगा, जिसके बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
क्या कहा ट्रंप ने?
न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान पर जीत के बाद वे होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पहले से ही जलमार्ग पर नौसैनिक नाकाबंदी है और बिना अमेरिकी इजाज़त के कोई भी जहाज़ वहां से नहीं गुज़र सकता। इसके कुछ घंटों बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक और पोस्ट में दावा किया कि जलडमरूमध्य पूरी तरह “खुला और सामान्य रूप से काम कर रहा है” और वहां बिछाई गई सभी समुद्री माइनें हटाई या निष्क्रिय की जा चुकी हैं।
नक्शे वाला विवादित पोस्ट
ट्रंप ने Truth Social पर होर्मुज जलडमरूमध्य का एक नक्शा भी साझा किया, जिसमें इसे “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया। यह पोस्ट उस समय आई जब 60 दिन की बातचीत की समय-सीमा बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी और ईरान ने साफ कर दिया था कि जलमार्ग तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका उसकी शर्तें नहीं मानता।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम गरीबाबादी ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को न तो किसी ट्वीट से, न किसी विमानवाहक पोत से, न किसी आदेश से और न ही किसी चुनावी भाषण से कब्ज़े में लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जलमार्ग हमेशा से ईरान का रहा है और आगे भी ईरान के ही नियंत्रण में रहेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी ट्रंप के बयानों को “काल्पनिक भ्रम” करार दिया।
भारत में भी दिखी प्रतिक्रिया
हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी इस पर व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी और अमेरिका के नक्शे में कैलिफोर्निया को हाइलाइट कर उसे “नया ईरानी क्षेत्र” बताते हुए एक पोस्ट साझा की।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। इसकी सबसे संकरी जगह पर चौड़ाई महज 21 समुद्री मील (करीब 39 किलोमीटर) है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुज़रता था। फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग से होने वाला यातायात लगभग ठप पड़ चुका है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी दावा कानूनी रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आता है और ईरान व ओमान दोनों के तटीय अधिकार क्षेत्र में ओवरलैप करता है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर के अनुसार ट्रंप का यह बयान मुख्य रूप से अमेरिकी घरेलू दर्शकों, खासकर अपने समर्थकों को ध्यान में रखकर दिया गया प्रतीत होता है। इस पूरे मसले पर Al Jazeera की विस्तृत रिपोर्ट में भी इसे कानूनी और व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव बताया गया है।
क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है, जबकि ईरान लगातार जलमार्ग में जहाज़ों पर हमलों का दावा करता रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि यह नाकाबंदी अनिश्चित काल तक जारी रह सकती है। इसी बीच अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को बदलने के लिए यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को इलाके में भेजा जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी हाल ही में एक तेल जहाज़ पर हमले की जानकारी दी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। CNN की लाइव रिपोर्टिंग के अनुसार फिलहाल दोनों पक्षों के बीच कोई सीधी बातचीत निर्धारित नहीं है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस टकराव पर ईरान से बढ़ते तनाव और ट्रंप की बातचीत से इनकार से जुड़ी हमारी पिछली रिपोर्ट में विस्तार से पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए हमारा Latest News सेक्शन देखें।
आगे क्या?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई औपचारिक बातचीत निर्धारित नहीं है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, जबकि ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटाता और प्रतिबंध वापस नहीं लेता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाज़ार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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