
Asia Cup Trophy Mohsin Naqvi महिला एशिया कप 2026 का खिताब जीतने के बावजूद भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई। 13 सितंबर को दुबई में श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार खिताब जीतने के बाद हरमनप्रीत कौर की टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इस फैसले ने प्रेजेंटेशन सेरेमनी को करीब एक घंटे तक टाल दिया और एक बार फिर क्रिकेट और राजनीति के आपस में जुड़ने की बहस छेड़ दी।
ट्रॉफी ना लेने का मुख्य कारण क्या था?
BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ किया कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि एक सोचा-समझा और संस्थागत निर्णय था। उनके मुताबिक मोहसिन नकवी, जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं, भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे किसी व्यक्ति से ट्रॉफी स्वीकार करना उचित नहीं समझा गया। सैकिया ने यह भी बताया कि यह फैसला पिछले साल पुरुष टीम द्वारा लिए गए इसी तरह के रुख के साथ एकजुटता दिखाने के लिए लिया गया।
पहलगाम हमले से जुड़ी भावनाएं भी वजह
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फैसला 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के साथ एकजुटता दिखाने और भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनावपूर्ण रिश्तों को ध्यान में रखते हुए लिया गया। BCCI सचिव ने कहा कि यह फैसला देश के लोगों की भावनाओं और ऑपरेशन सिंदूर के बाद की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया।
दो विकल्प दिए गए, लेकिन बात नहीं बनी
BCCI के मुताबिक टीम पूरी तरह से ट्रॉफी लेने से इनकार नहीं कर रही थी। बोर्ड ने दो विकल्प सुझाए थे — या तो ACC के डिप्टी चेयरमैन खालिद अल जरूनी ट्रॉफी सौंपें, या फिर कोई BCCI प्रतिनिधि यह जिम्मेदारी निभाए। हालांकि मोहसिन नकवी इनमें से किसी भी विकल्प पर राजी नहीं हुए, जिसके बाद भारतीय टीम अपने रुख पर अड़ी रही।
कैसे हुई पूरी घटना?
फाइनल जीतने के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में करीब एक घंटे की देरी हुई। मोहसिन नकवी ने रनर्स-अप श्रीलंका की कप्तान चामरी अटापट्टू को चेक सौंपा और वेन्यू से चले गए, लेकिन पिछले साल पुरुषों के फाइनल की तरह इस बार वे ट्रॉफी अपने साथ नहीं ले गए। भारतीय टीम ने BCCI सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला की मौजूदगी में मुख्य मंच से अलग अपना मेडल सेरेमनी आयोजित किया।
पिछले साल पुरुष टीम के साथ भी हुआ था ऐसा ही
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया हो। पिछले साल सितंबर 2025 में पुरुषों के एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को हराने के बाद सूर्यकुमार यादव की टीम ने भी इसी तरह ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था। उस समय भी ट्रॉफी ACC के दुबई ऑफिस में ही रखी रह गई थी और महीनों तक विवाद सुलझ नहीं पाया।
BCCI का रुख — जीत पर कोई असर नहीं
BCCI सचिव ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से टीम की उपलब्धि कम नहीं होती। उन्होंने कहा कि टीम ने टूर्नामेंट में हर मैच एकतरफा अंदाज में जीता और भारत में महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता का इससे बड़ा सबूत कुछ और नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में पाकिस्तान के खिलाफ खेलना जारी रखेगा, लेकिन इसका मतलब हर औपचारिकता को स्वीकार करना जरूरी नहीं है।
निष्कर्ष
रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप जीतने की खुशी के बीच ट्रॉफी विवाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों में मौजूद राजनीतिक तनाव को सामने लाया है। BCCI के मुताबिक यह फैसला भावनाओं और सिद्धांतों पर आधारित था, ना कि टीम की उपलब्धि पर सवाल उठाने वाला। आने वाले समय में इस विवाद को लेकर ACC और BCCI के बीच और बातचीत होने की उम्मीद है।
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