Modi Xi Jinping meeting BRICS 2026 नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को करीब 50 मिनट तक द्विपक्षीय बातचीत हुई। यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2020 के गलवान टकराव के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक द्विपक्षीय बैठक है।
50 मिनट तक चली अहम बातचीत
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच यह बातचीत ब्रिक्स दिल्ली 2026 के बैनर तले हुई। बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। सीमा विवाद के बाद से तनावपूर्ण रहे भारत-चीन संबंधों में यह मुलाकात एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है।
चीन का बयान: ‘प्रतिद्वंदी नहीं, साझेदार हैं दोनों देश’
बैठक के बाद चीन की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि भारत और चीन प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार हैं। चीनी पक्ष के इस बयान को दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
ब्रिक्स समिट 2026 का महत्व
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रमुख नेता शामिल हुए हैं। इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मोदी-जिनपिंग मुलाकात को इस समिट की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटनाओं में गिना जा रहा है।
क्या कहते हैं जानकार
विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में सतर्क सुधार की शुरुआत हो सकती है, हालांकि सीमा से जुड़े मुद्दों पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच गंभीर बातचीत की जरूरत बनी हुई है। यह दावा अभी प्रारंभिक स्तर पर है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
गलवान झड़प के बाद पहली बार हुई इस द्विपक्षीय मुलाकात पर देश-दुनिया की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में इस बातचीत के नतीजों का असर भारत-चीन व्यापार और सीमा वार्ता पर भी देखने को मिल सकता है। updatetimes.in इस खबर से जुड़े हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।
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