10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर ‘महा-जुटान’: AAP, लेफ्ट छात्र संगठन और CJP एक साथ, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

🔄 6 October 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 54 views
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर ‘महा-जुटान’: AAP, लेफ्ट छात्र संगठन और CJP एक साथ, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

Jantar Mantar protest

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अब सड़क पर बड़े आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई राजनीतिक दल और छात्र संगठन एक साथ प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। पुलिस ने भी इसे देखते हुए सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कौन-कौन होगा शामिल?

  • आम आदमी पार्टी: दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को ऐलान किया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन होगा। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की।
  • पांच वामपंथी छात्र संगठन: SFI, AISF, AISA, PSU और AISB ने मंगलवार को संयुक्त बयान जारी कर बड़ी संख्या में शामिल होने की बात कही।
  • कॉकरोच जनता पार्टी (CJP): संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इसी दिन दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है।
  • कांग्रेस: नेत्री मुमताज पटेल ने कहा कि तैयारियां पूरी हैं और उस दिन दिल्लीभर से लोग जंतर-मंतर पर मौजूद रहेंगे।

प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं?

  1. CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ मुकदमा
  2. मतदाता सूची का SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) रद्द किया जाए
  3. निर्वाचन आयोग में सुधार

पुलिस पर आरोप, पुलिस का इनकार

छात्र संगठनों का आरोप है कि पिछले प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, उन्हें घसीटा और पत्रकारों तक को नहीं बख्शा। एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी का मामला भी राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। वहीं दिल्ली पुलिस के DCP इन आरोपों का खंडन कर चुके हैं और कहते आए हैं कि बिना अनुमति प्रदर्शन की इजाजत नहीं थी।

पिछली बार जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?

2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत पाबंदियां लगी थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 700 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। इनमें आतिशी, सौरभ भारद्वाज, योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और मनोज झा जैसे नाम थे। इलाके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद रही थीं।

विवाद की जड़ क्या है?

प्रदर्शनकारी SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बड़ी संख्या में नाम कटने के आरोप लगा रहे हैं। ये प्रदर्शन द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुए, जिसमें आरोप था कि ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की कई शिकायतों को नजरअंदाज किया। चुनाव आयोग और सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब आता है, यह देखना बाकी है।

अब आगे क्या?

पुलिस ने जुलाई के प्रदर्शन के अनुभव के बाद बैरिकेडिंग मजबूत की है और अतिरिक्त बल की तैयारी की है। मंगलवार को भी संसद के आसपास रफी मार्ग और रायसीना रोड समेत कई सड़कें बंद की गईं। सवाल यही है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी या फिर पिछली बार जैसी हिरासत और टकराव दिखेगा।

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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