दिल्ली में इन दिनों सबसे बड़ी खबर बनी हुई है Chalo Sansad protest, जो लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है।
यह आंदोलन जून के अंत से जंतर-मंतर पर चल रहा है, जिसकी अगुवाई जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP संस्थापक अभिजीत डिप्के कर रहे हैं। दोनों केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिसकी वजह NEET-UG जैसी परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गड़बड़ियां हैं। शुरुआत में यह आंदोलन पेपर लीक के खिलाफ था, लेकिन बाद में इसमें बेरोज़गारी और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी जुड़ गए, खासकर जब वांगचुक इस मुहिम से जुड़े तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान मिलने लगा।
संसद तक मार्च की कोशिश में भिड़ंत
Chalo Sansad 20 जुलाई को दस हज़ार से ज़्यादा प्रदर्शनकारी टॉल्स्टॉय मार्ग-संसद मार्ग चौराहे पर जमा हो गए और पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश में झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस ने दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में सत्यापन के बाद छोड़ने की बात कही गई। पुलिस का कहना है कि संसद तक मार्च के लिए किसी को अनुमति नहीं दी गई थी।
वांगचुक अस्पताल में, विपक्षी सांसदों को मिलने से रोका गया
आज (22 जुलाई) की सबसे बड़ी अपडेट यह रही कि गुरुग्राम में पुलिस ने विपक्षी सांसदों के एक दल को मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक से मिलने से रोक दिया। वहीं दूसरी ओर, DMK सांसद कनिमोझी जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुईं और कहा कि प्रवेश परीक्षाएं गरीब तबके के छात्रों के सपनों में बाधा बन रही हैं।
सोनम वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर सरकार से अपील करते हुए लिखा कि सरकार की तरफ से भरोसा मिलते ही वे अपना अनशन तोड़ने पर विचार करेंगे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों से भी आंदोलन थोड़ी देर रोकने की अपील करेंगे।
दिल्ली में हाई अलर्ट
Chalo Sansad राजधानी में संसद के मानसून सत्र और इस प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है, कई मेट्रो स्टेशन भी सुरक्षा कारणों से बंद किए गए। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठे नज़र आए।
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