Jantar Mantar lathicharge: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती, महिलाओं और आम लोगों पर बल प्रयोग के आरोप

🔄 22 July 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 269 views
Jantar Mantar lathicharge: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती, महिलाओं और आम लोगों पर बल प्रयोग के आरोप

Jantar Mantar lathicharge: दिल्ली के जंतर मंतर से 20 जुलाई 2026 को शुरू हुआ “संसद चलो” मार्च उस वक्त हिंसक मोड़ ले गया जब हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ते हुए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने लगे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो के नेतृत्व में निकला यह मार्च मंडी हाउस से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक पहुंचा, जहां दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बंदोबस्त किए थे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब भीड़ ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने बिना उचित चेतावनी के लाठीचार्ज शुरू कर दिया और कई जगह आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। घटनास्थल से आई तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला प्रदर्शनकारियों को भी घसीट कर ले जाया गया, और कई लोगों को जमीन पर गिराकर उठा लिया गया। कई चश्मदीद गवाहों का कहना है कि इस कार्रवाई में बच्चे और बेटियां भी चपेट में आए, जिन्हें बलपूर्वक हटाया गया — हालांकि इन दावों की प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि पुलिस की लाठियों में धातु के पिन या नुकीले हिस्से लगे थे, जिससे चोट और गहरी हुई। यह एक गंभीर आरोप है जिसकी अभी तक कोई स्वतंत्र या अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे एक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि एक स्थापित तथ्य के रूप में।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस झड़प में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों को हल्की चोटें आई हैं, और 10 से 15 लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के चलते बल प्रयोग करना पड़ा, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनका मार्च शांतिपूर्ण था और पुलिस ने असमान बल का इस्तेमाल किया।

CJP नेतृत्व, जिसमें अभिजीत डिपके शामिल हैं, ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। डिपके ने इससे पहले भी सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद भूख हड़ताल शुरू की थी, जो सोमवार को खत्म हुई। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही के चलते शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा नहीं मिल पाई।

मानवाधिकार समूहों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। दिल्ली हाईकोर्ट में पहले से ही एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की लगातार फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करके एक “डर का माहौल” बनाया, जो उनके शांतिपूर्ण एकत्रित होने के अधिकार का उल्लंघन है।

इस घटना ने एक बार फिर प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग की सीमाओं पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की, जिसके चलते कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई।

Jantar Mantar lathicharge:जब तक स्वतंत्र जांच या अधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक “पिन लगी लाठी” जैसे विशिष्ट दावों को पूरी तरह से सत्यापित नहीं माना जा सकता — लेकिन लाठीचार्ज, आंसू गैस और महिला-बाल प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोप खुद एक गंभीर सार्वजनिक चिंता का विषय हैं, जिसमें दिल्ली पुलिस और सरकार दोनों की जवाबदेही बनती है।

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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