US ने Infosys, TCS, Wipro समेत 8 कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड, वेंस के ‘indentured servants’ बयान पर भारत में नाराजगी

🔄 11 October 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 39 views
US ने Infosys, TCS, Wipro समेत 8 कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड, वेंस के ‘indentured servants’ बयान पर भारत में नाराजगी

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने भारतीय आईटी पेशेवरों से जुड़े एक बड़े फैसले में Infosys, TCS (Tata), Wipro, HCL, Cognizant और Capgemini समेत 8 कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड आवेदन की प्रक्रिया से सस्पेंड कर दिया है। PTI के मुताबिक यह घोषणा गुरुवार, 8 अक्टूबर को अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने की। यह green card suspension अमेरिका के एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स की कार्रवाई के तहत किया गया है।

Green card suspension: क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से सस्पेंड किया है, जो विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर करने की अनिवार्य शर्त है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार श्रम विभाग अब इन कंपनियों से जुड़े किसी नए PERM आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा और पहले से लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया नहीं करेगा।

सोंडरलिंग ने Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini को सस्पेंड करने की घोषणा की, जबकि Microsoft और Adobe को “कई सक्रिय संघीय जांचों” के कारण प्रोग्राम से बाहर किया गया।

वेंस ने क्या आरोप लगाए?

उप-राष्ट्रपति वेंस ने आरोप लगाया कि कंपनियां इस प्रोग्राम का इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारी लाने और अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने के लिए कर रही हैं। उन्होंने H-1B वीजा पर आए कर्मचारियों को “foreign indentured servants” और इन कंपनियों को “visa mills” कहा। वेंस का दावा है कि बाहरी आउटसोर्सिंग फर्मों के जरिए आए कर्मचारी समान पद पर अमेरिकी नागरिक से करीब 48,000 डॉलर कम कमाते हैं। उन्होंने Microsoft पर भी आरोप लगाया कि उसने पिछले साल 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ लिया। ये सभी अमेरिकी प्रशासन के आरोप हैं और कंपनियों की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है।

इसी कार्रवाई के साथ वेंस ने नौ बड़े विश्वविद्यालयों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले J-1 रिसर्च स्कॉलर वीजा प्रोग्राम की जांच की भी घोषणा की, जिनमें Yale, Harvard, Stanford और Caltech शामिल हैं।

भारत की प्रतिक्रिया

PTI के अनुसार हर साल मंजूर होने वाली कुल H-1B याचिकाओं में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय पेशेवरों की होती हैं, इसलिए इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर माना जा रहा है। ThePrint की एक रिपोर्ट की हेडलाइन के मुताबिक भारत ने वेंस की टिप्पणी को “deeply offensive” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आधिकारिक बयान का पूरा ब्योरा सामने आने पर खबर अपडेट की जाएगी।

भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए क्या मायने?

ग्रीन कार्ड के इंतजार में बैठे जिन कर्मचारियों के आवेदन इन कंपनियों के जरिए चल रहे हैं, उनके मामलों पर अनिश्चितता बन गई है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सस्पेंशन कितने समय तक रहेगा या कंपनियां इसे कानूनी चुनौती देंगी या नहीं। सभी प्रभावित कर्मचारी अपनी कंपनी के HR और इमिग्रेशन वकील से ताजा स्थिति की जानकारी लें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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