Pralhad Joshi Education Minister के तौर पर 25 जुलाई 2026 को नियुक्त किए गए हैं। यह बड़ा फेरबदल NEET-UG पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हुआ, जिसके चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी।

कौन हैं प्रल्हाद जोशी?
प्रल्हाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पूर्व नाम बीजापुर) में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा हुबली के रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल से हुई, जबकि उन्होंने हुबली के के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक (बीए) की डिग्री हासिल की। कम उम्र में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। (पूरी प्रोफाइल विकिपीडिया पर देखें)
राजनीतिक सफर की शुरुआत
1990 के दशक की शुरुआत में हुबली के इदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें कर्नाटक में एक प्रमुख भाजपा नेता के रूप में स्थापित किया। समर्थक इसे राष्ट्रवादी अभियान मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस आंदोलन ने राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया। जोशी 2004 से लगातार पांच बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। वे 2012 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
अब तक कौन-कौन से मंत्रालय संभाले?
प्रल्हाद जोशी का प्रशासनिक अनुभव काफी विस्तृत रहा है:
- 2019-2024: संसदीय कार्य मंत्री
- 2019-2024: कोयला मंत्री
- 2019-2024: खान मंत्री
- 2024 से अब तक: उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री
- 2024 से अब तक: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री
- 2026 से: शिक्षा मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर उन्होंने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना जैसी बड़ी पहलों की अगुवाई की है।
क्या Pralhad Joshi पर कोई मामला दर्ज है?
अब तक प्रल्हाद जोशी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार या आपराधिक मामले में कोई अदालती दोषसिद्धि सामने नहीं आई है। हालांकि अक्टूबर 2024 में उनके भाई गोपाल जोशी, बहन विजयलक्ष्मी जोशी और भतीजे अजय जोशी के खिलाफ बेंगलुरु में एक धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा टिकट दिलाने के नाम पर एक पूर्व विधायक की पत्नी से करीब 2.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। प्रल्हाद जोशी ने इस मामले से खुद को पूरी तरह अलग बताते हुए कहा था कि वे दशकों से गोपाल जोशी से अलग रह रहे हैं और उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
इसके अलावा, कर्नाटक सरकार द्वारा पुराने हुबली दंगों से जुड़े मामले वापस लिए जाने पर प्रल्हाद जोशी ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया था, जिस पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ उनकी तीखी बयानबाजी भी हुई।
शिक्षा मंत्रालय के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
प्रल्हाद जोशी ऐसे समय पर शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं जब NEET-UG परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों की तरफ से जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। मोदी सरकार के सबसे अनुभवी मंत्रियों में गिने जाने वाले जोशी अब अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।
निष्कर्ष
प्रल्हाद जोशी का प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ उन्हें इस अहम जिम्मेदारी के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है, लेकिन NEET विवाद के तुरंत बाद हुई इस नियुक्ति पर देश की निगाहें टिकी रहेंगी कि वे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव लाते हैं।
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