कौन हैं तुकाराम मुंढे?
IAS Tukaram Mundhle Action तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन गांव के जिला परिषद स्कूल में पढ़ाई और खेती के काम में बीता। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की और 2004 में UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की, वो भी बिना किसी कोचिंग के, देश में 20वीं रैंक के साथ।
21 साल में 25 तबादले — क्यों हैं इतने चर्चित?
2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे प्रशासनिक हलकों में अपनी सख्त कार्यशैली और बिना दबाव नियम लागू करने के लिए जाने जाते हैं। लगभग दो दशक के करियर में उनका करीब 25 बार तबादला हो चुका है — जिसे अक्सर राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इन बार-बार होने वाले ट्रांसफर के बावजूद उन्हें जल संरक्षण, स्वास्थ्य, ट्रैफिक और शहरी सुविधाओं के क्षेत्र में किए गए काम के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं।
FDA कमिश्नर बनते ही एक्शन शुरू
IAS Tukaram Mudhle FDA की कमान संभालते ही मुंढे ने विभाग की कार्यशैली पूरी तरह बदल दी। कमिश्नर पद संभालने के महज एक हफ्ते के भीतर FDA टीमों ने राज्यभर में 103 जगहों पर छापे मारे और 102 लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 86 दुकानों को सील किया गया और करीब 34 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया।
सिंथेटिक दूध का बड़ा खुलासा
हाल ही में एक पॉडकास्ट में मुंढे ने सिंथेटिक दूध को लेकर बड़ा खुलासा किया — उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में शैंपू, केमिकल और अन्य पदार्थों से नकली दूध तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मुंबई में मिलावटी दूध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई तेज हो गई।
मुंबई में बड़ी छापेमारी
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में मुंबई में FDA और पुलिस की टीमों ने दो बड़ी कार्रवाइयां कीं। दहिसर पूर्व इलाके में अमूल और गोकुळ जैसी नामांकित कंपनियों के नाम पर बनावटी दूध तैयार कर बेचने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया गया। इसके अलावा, ब्लिंकिट के गोदाम पर भी छापा मारा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई में एक महीने के भीतर करीब 1,497 जगहों पर कार्रवाई हो चुकी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई रोक
हालांकि इस सख्त कार्रवाई को कानूनी चुनौती भी मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने छत्रपति संभाजीनगर, जालना, जलगांव और अहिल्यानगर की 8 डेयरियों के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश देते हुए FDA को झटका दिया। इसी तरह दवा कंपनियों को लेकर भी कोर्ट के दखल की खबरें सामने आई हैं, जहां बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कैडिला फार्मा जैसी कंपनी को एक महीने की राहत मिली।
आगे क्या?
मुंढे का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे किसी भी विभाग की कमान संभालते ही आक्रामक तरीके से काम करते हैं। FDA में उनका फोकस अब भी मिलावट, नकली दवाओं और नकली दूध के खिलाफ चल रहे अभियान पर टिका है, भले ही कोर्ट से कुछ मामलों में झटका लगा हो। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े छापे और गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं, खासकर त्योहारी सीजन नजदीक आते ही मिठाई और डेयरी उत्पादों की जांच तेज होने की संभावना है।
Leave a Reply