उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दिल्ली की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। न्याय की मांग को लेकर इंडिया गेट पर रातभर चले प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता, विपक्षी नेताओं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में हिरासत में लिए गए परिवार को छोड़ दिया गया। पिता ने साफ चेतावनी दी है कि न्याय न मिलने तक देशभर में आंदोलन होगा।
Ankita Bhandari Case: इंडिया गेट पर क्या हुआ?
अमर उजाला और ANI-IANS की रिपोर्टों के मुताबिक, अंकिता भंडारी के परिवार और समर्थकों ने इंडिया गेट पर पूरी रात धरना दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता, विपक्षी नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
कौन-कौन पहुंचा?
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी धरना स्थल पर पहुंचे और अंकिता की मां सोनी देवी व पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी से मुलाकात की
- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सुप्रिया श्रीनेत और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी प्रदर्शन में मौजूद रहे
परिवार की मुख्य मांग क्या है?
परिवार के मुताबिक, 12 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की खबर सामने आने के बाद उन्होंने विरोध शुरू किया। परिवार की मांग है कि अंकिता हत्याकांड से जुड़े सवालों की सीबीआई जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
अंकिता के माता-पिता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी हस्तक्षेप की अपील की है। धरने के दौरान मां सोनी देवी भावुक नजर आईं और उन्होंने राष्ट्रपति से परिवार की पीड़ा समझने की गुहार लगाई। यह परिवार का पक्ष और मांग है; नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।
पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी की चेतावनी
हिरासत में लिए जाने के बाद अंकिता के पिता ने कहा कि जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलता, देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उनकी पहली मांग दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की है, और ऐसा न होने पर वे एक बार फिर पूरे देश में सड़कों पर उतरने की बात कह रहे हैं।
विपक्ष का रुख
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पार्टी अंकिता के साथ खड़ी थी, है और रहेगी। उनके मुताबिक हिरासत में लेने से न्याय की लड़ाई खत्म नहीं होगी और विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
अब आगे क्या?
मामला अब सड़क से सियासत तक पहुंच चुका है। एक तरफ परिवार जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग पर अड़ा है, दूसरी तरफ आगे की कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सबकी नजर है। अदालत और जांच एजेंसी से जुड़े किसी भी आरोप को तब तक आरोप ही माना जाना चाहिए जब तक वे सिद्ध न हों। हम इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं, ताज़ा अपडेट के लिए जुड़े रहिए updatetimes.in के साथ।
स्रोत: अमर उजाला, ANI, IANS (15 अक्टूबर 2026)। तस्वीर: प्रतीकात्मक तस्वीर।
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