Jaipur Government School: स्कूल या मजबूरी का ठिकाना? बच्चों की पढ़ाई पर कब जागेगी सरकार

🔄 22 August 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 114 views
Jaipur Government School: स्कूल या मजबूरी का ठिकाना? बच्चों की पढ़ाई पर कब जागेगी सरकार

जयपुर में एक सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीरें एक बार फिर राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में सपने होने चाहिए, उसी उम्र में उन्हें ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जहां बुनियादी सुविधाएं तक पूरी नहीं हैं।

जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा क्षेत्र से सामने आया मामला

जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों और स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकारी स्कूल की कक्षाएं अस्थायी व्यवस्था में संचालित हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल भवन की स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में आगे ले जाने की बात की जाती है, तो सरकारी स्कूलों के बच्चों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक भवन तक क्यों नहीं मिल पा रहा?

सरकार के अपने आंकड़े क्या कहते हैं?

राज्य सरकार ने स्वयं विधानसभा में यह जानकारी दी है कि राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। इनमें से जयपुर जिले में ही 38 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के 2,047 स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध न होने की जानकारी भी सामने आई है।

सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं है

यह मामला केवल जयपुर के एक स्कूल तक सीमित नहीं होना चाहिए। सवाल उस पूरी व्यवस्था का है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार तो दिया जाता है, लेकिन उन्हें सुरक्षित भवन, साफ शौचालय, पर्याप्त पानी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में व्यवस्था पीछे रह जाती है। सरकार के पास योजनाएं हैं, बजट है और विभाग भी है। ऐसे में अगर किसी बच्चे को आज भी उचित स्कूल भवन नहीं मिल रहा, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सरकार से सीधे सवाल

  • क्या बच्चों की शिक्षा केवल किताबें और शिक्षक उपलब्ध कराने से पूरी हो जाती है?
  • क्या एक सुरक्षित स्कूल भवन बच्चों का अधिकार नहीं है?
  • जर्जर स्कूल भवनों और भवनविहीन स्कूलों की समस्या के समाधान की समयसीमा क्या है?
  • जब सरकार इन समस्याओं से वाकिफ है, तो इन्हें दूर करने के लिए ज़मीन पर तेज़ी से काम क्यों नहीं दिखता?

स्कूलों में कवरेज को लेकर हाल का विवाद

हाल ही में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटो, वीडियो और कवरेज को लेकर राजस्थान शिक्षा विभाग के निर्देशों पर भी विवाद हुआ था। सरकार की ओर से इसका उद्देश्य बच्चों की निजता और सुरक्षा बताया गया, जबकि आलोचकों ने इसे सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत पर सार्वजनिक निगरानी को सीमित करने से जोड़कर देखा। इससे पहले Barotha की Sanskar Academy से जुड़े मामले में भी स्कूलों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे थे।

यहां मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं होना चाहिए, मुद्दा बच्चों का होना चाहिए। अगर स्कूल भवन की हालत खराब है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए, अगर भवन नहीं है तो भवन बनाया जाना चाहिए, अगर शौचालय नहीं है तो शौचालय बनवाया जाना चाहिए। और अगर व्यवस्था में कमी है तो उसे स्वीकार कर सुधारा जाना चाहिए।

आखिर बच्चों की गलती क्या है?

एक बच्चे ने न सरकार चुनी है, न बजट बनाया है और न स्कूल भवन की जिम्मेदारी ली है। उसकी जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ना है और अपने भविष्य का निर्माण करना है। इसलिए सरकार से एक सीधी मांग होनी चाहिए—राजस्थान के हर बच्चे को सुरक्षित स्कूल, बेहतर वातावरण और सम्मानजनक शिक्षा मिले। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बच्चों की शिक्षा उससे ऊपर होनी चाहिए। सरकार से सवाल करना विरोध नहीं, लोकतंत्र में जवाबदेही की मांग है। जयपुर में हाल ही में हुई हर घर तिरंगा रैली जैसे बड़े आयोजनों की तरह ही स्कूली बुनियादी ढांचे पर भी उतनी ही सक्रियता दिखनी चाहिए।

राजस्थान में सरकारी नौकरी और भर्ती अपडेट

शिक्षा विभाग सहित राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में समय-समय पर शिक्षक भर्ती, प्रशासनिक और अन्य सरकारी पदों के लिए भर्तियां निकलती रहती हैं। युवा उम्मीदवार RSMSSB, RPSC और शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर बनाए रखें ताकि किसी भी नई भर्ती और आवेदन की अंतिम तिथि की जानकारी समय पर मिल सके। Updatetimes.in पर हम राजस्थान से जुड़ी हर सरकारी नौकरी और भर्ती अपडेट सबसे पहले लेकर आते हैं।

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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