Delhi GB Road Aur Mumbai Kamathipura Red Light Area दिल्ली का जीबी रोड (Garstin Bastion Road) और मुंबई का कमाठीपुरा — देश के दो सबसे पुराने और सबसे बड़े रेड लाइट एरिया हैं। दोनों जगहों पर हजारों महिलाएं दशकों से रहती और काम करती आई हैं। इन इलाकों की सच्चाई सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि मानव तस्करी, कानून, पुनर्वास और पुलिस की भूमिका से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है।

जीबी रोड, दिल्ली: देश की राजधानी में सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया
पुरानी दिल्ली के लाहौरी गेट और अजमेरी गेट के बीच फैला जीबी रोड दिन में हार्डवेयर मार्केट होता है और रात में देश के सबसे बड़े रेड लाइट इलाकों में तब्दील हो जाता है। यहां करीब 90 कोठों में हजारों महिलाएं रहती हैं। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से बड़ी संख्या नेपाल, बांग्लादेश और देश के अलग-अलग राज्यों से तस्करी कर लाई गई लड़कियों की है।
कमाठीपुरा, मुंबई: एशिया का सबसे पुराना रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट
मुंबई के ग्रांट रोड इलाके में स्थित कमाठीपुरा ब्रिटिश काल से चला आ रहा है, जब इसे ‘लाल बाजार’ कहा जाता था। यहां 14 गलियों में सैकड़ों महिलाएं रहती हैं। हाल के वर्षों में इस इलाके के पुनर्विकास (redevelopment) की योजना को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसके तहत करीब 8,000 परिवारों के पुनर्वास की बात कही गई है। हालांकि यहां काम करने वाली ज्यादातर महिलाओं के पास संपत्ति के दस्तावेज न होने के कारण उन्हें इस योजना में शामिल किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है कानूनी स्थिति?
Delhi GB Road Aur Mumbai Kamathipura Red Light Area :,भारत में वयस्कों के बीच सहमति से यौन कार्य (consensual sex work) गैरकानूनी नहीं है, लेकिन कोठा चलाना, दलाली करना और सार्वजनिक स्थान पर ग्राहक तलाशना अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) के तहत अपराध है। साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि सेक्स वर्कर्स के साथ भी गरिमा के साथ व्यवहार होना चाहिए और पुलिस को उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
अच्छा क्या है?
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेक्स वर्कर्स को कानूनी सुरक्षा और सम्मान से जीने का अधिकार मिला है।
- प्रेरणा, अपने आप वीमेंस कलेक्टिव, शक्ति वाहिनी जैसी कई एनजीओ दशकों से इन इलाकों में महिलाओं और उनके बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए काम कर रही हैं।
- कमाठीपुरा में पुनर्विकास योजना से रहने की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या है बुरा?
- मानव तस्करी सबसे बड़ी समस्या है। नाबालिग लड़कियों को भी जबरन इन इलाकों में लाए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
- स्वच्छता, हवादार कमरों और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।
- दस्तावेजों के अभाव में पुनर्वास और पुनर्विकास योजनाओं का फायदा इन महिलाओं तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता।
पुलिस कितना सपोर्ट करती है?
पुलिस की भूमिका को लेकर तस्वीर मिली-जुली है। एक तरफ दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और मुंबई पुलिस समय-समय पर रेड कर नाबालिगों और तस्करी की शिकार महिलाओं को रेस्क्यू करती रही हैं। दूसरी तरफ, दिल्ली महिला आयोग जैसी संस्थाओं ने कई बार आरोप लगाए हैं कि स्थानीय थाने के कुछ कर्मचारी कोठा मालिकों को रेड से पहले सूचना दे देते हैं, जिससे कार्रवाई नाकाम हो जाती है। एनजीओ शक्ति वाहिनी का कहना है कि जब भी क्राइम ब्रांच या सीनियर अधिकारियों के साथ रेड की जाती है, तभी असली रेस्क्यू हो पाता है।
वहीं पुलिस अधिकारियों का पक्ष है कि वे नियमित रूप से रेस्क्यू और पुनर्वास में शामिल रहते हैं, और कई बार महिलाएं खुद इस पेशे को छोड़ने को तैयार नहीं होतीं क्योंकि उन्हें भविष्य की सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं होता।
निष्कर्ष
जीबी रोड और कमाठीपुरा जैसे इलाके सिर्फ रेड लाइट एरिया नहीं, बल्कि गरीबी, तस्करी, कानूनी उलझन और सामाजिक बहिष्कार की परतों में लिपटी कहानियां हैं। असली बदलाव तभी संभव है जब पुनर्वास योजनाएं दस्तावेजों की शर्त से परे जाकर हर महिला तक पहुंचें और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही तय हो।
रोजगार और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी
सेक्स वर्कर्स के पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं और एनजीओ पहलों की ताजा जानकारी के लिए Updatetimes.in से जुड़े रहें।
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