
E20 Petrol भारत में अब ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल मिल रहा है। सरकार ने अप्रैल 2026 से इसे पूरे देश में अनिवार्य कर दिया है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर E20 पेट्रोल बनता कैसे है, और इसके क्या फायदे और नुकसान हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
E20 पेट्रोल क्या है और कैसे बनता है?
E20 पेट्रोल दरअसल सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (Ethanol) मिलाकर तैयार किया जाता है, यानी इसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक तरह का जैव-ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ने, मक्का, चावल की भूसी, गेहूं और खराब हो चुके अनाज जैसी कृषि उपजों से तैयार किया जाता है।
इसे बनाने की प्रक्रिया कुछ इस तरह है –
1. कच्चे माल का चयन
सबसे पहले गन्ने के रस, गुड़ (मोलासिस) या अनाज जैसे मक्का और टूटे चावल को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
2. किण्वन (फर्मेंटेशन)
इन कच्चे पदार्थों में मौजूद शर्करा (शुगर) को यीस्ट की मदद से किण्वित (फर्मेंट) किया जाता है, जिससे अल्कोहल बनता है।
3. आसवन (डिस्टिलेशन)
फर्मेंटेशन के बाद बने तरल को आसवन प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे शुद्ध एथेनॉल अलग किया जाता है।
4. पेट्रोल के साथ मिश्रण (ब्लेंडिंग)
अंत में तेल कंपनियां इस शुद्ध एथेनॉल को सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत के अनुपात में मिलाकर E20 पेट्रोल तैयार करती हैं, जिसे पेट्रोल पंपों तक पहुंचाया जाता है।
E20 पेट्रोल के फायदे
1. प्रदूषण में कमी
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से E10 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में करीब 30 प्रतिशत तक की कमी आती है, जिससे प्रदूषण कम होता है।
2. विदेशी मुद्रा की बचत
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से अब तक देश को करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, क्योंकि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है।
3. किसानों को फायदा
सरकार के मुताबिक 2014-15 से अक्टूबर 2025 तक किसानों को गन्ना, मक्का जैसी फसलों की आपूर्ति से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की आमदनी हुई है।
4. बेहतर ऑक्टेन नंबर
एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर पेट्रोल से ज्यादा (करीब 108.5) होता है, जिससे इंजन की एंटी-नॉकिंग क्षमता और परफॉर्मेंस बेहतर होती है, खासकर हाई-कंप्रेशन इंजन वाली आधुनिक गाड़ियों में।
E20 पेट्रोल के नुकसान
1. माइलेज में गिरावट
कई अध्ययनों में सामने आया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों के माइलेज में करीब 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यानी अगर कोई गाड़ी 15 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती थी, तो वह घटकर करीब 14 से 14.8 किमी प्रति लीटर तक रह सकती है।
2. पुरानी गाड़ियों में दिक्कत की आशंका
अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 (10 प्रतिशत एथेनॉल) के हिसाब से डिजाइन की गई थीं। ऐसी गाड़ियों के मालिकों ने इंजन में दिक्कत, रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान और परफॉर्मेंस में कमी जैसी शिकायतें दर्ज कराई हैं।
3. विरोध और जन आंदोलन
देश के कई हिस्सों में E20 के अनिवार्य रोलआउट को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन में लोगों ने वाहनों को नुकसान पहुंचने और माइलेज घटने की आशंका जताते हुए सरकार से इसे वैकल्पिक बनाने की मांग की थी।
4. सरकार और विशेषज्ञों का पक्ष
हालांकि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल और SIAM के अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि E20 से गाड़ियों की ड्राइवेबिलिटी, स्टार्टेबिलिटी या पार्ट्स की कंपैटिबिलिटी में कोई बड़ी समस्या नहीं पाई गई। सरकार का कहना है कि 1 अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी गाड़ियां E20 के अनुकूल सामग्री से बनाई गई हैं, और वाहन निर्माता कंपनियों को गाड़ी पर स्टिकर के जरिए इसकी जानकारी देना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर E20 पेट्रोल एक ओर जहां पर्यावरण और किसानों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए माइलेज घटने की चिंता भी बनी हुई है। ऐसे में अपनी गाड़ी की कंपैटिबिलिटी जांचना और निर्माता कंपनी की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।
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