Sugar Price Hike India: चीनी हुई महंगी, जानें असली वजह — क्या E20 एथेनॉल नीति है जिम्मेदार, सरकार से कहां हुई चूक?

🔄 24 August 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 36 views
Sugar Price Hike India: चीनी हुई महंगी, जानें असली वजह — क्या E20 एथेनॉल नीति है जिम्मेदार, सरकार से कहां हुई चूक?

Sugar Price Hike India त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले देशभर में चीनी की कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, और कई शहरों में यह उछाल और भी ज्यादा है। सवाल यह है कि आखिर अचानक चीनी इतनी महंगी क्यों हो गई, और क्या इसके पीछे सरकार की एथेनॉल नीति जिम्मेदार है?

कितनी बढ़ी चीनी की कीमत? पूरे आंकड़े

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार 20 जुलाई 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी। यह 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर लगभग 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में थोक चीनी की कीमत 4,716 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंचने की रिपोर्ट है, जबकि छत्रपति संभाजीनगर जैसे कुछ शहरों में खुली चीनी 75 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिकती देखी गई है।

सरकार ने बताई दाम बढ़ने की असली वजह

चीनी महंगी होने पर मचे हंगामे के बाद सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार के मुताबिक कीमतों में उछाल की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:

  • घरेलू उत्पादन में गिरावट: 2025-26 सीजन में शुरुआत में करीब 34.3 मिलियन टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, जो अब घटकर लगभग 30.6 मिलियन टन रहने का अनुमान है — यानी करीब 3.7 मिलियन टन की कमी।
  • मौसम की मार: महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश ने पैदावार को प्रभावित किया।
  • गन्ने की फसल में बीमारी: उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में रोग के चलते उत्पादकता और चीनी रिकवरी दोनों में कमी आई।
  • त्योहारी मांग: गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाइयों व खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है, जिससे मांग अचानक बढ़ गई।
  • जमाखोरी: कुछ विशेषज्ञों के अनुसार व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा करना भी कीमतों को हवा दे रहा है।

वैश्विक बाजार में भी चीनी महंगी

यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 जून 2026 को चीनी की कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई — यानी दो महीने से भी कम समय में करीब 16% की बढ़ोतरी।

E20 एथेनॉल नीति को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

भारत सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20 नीति) का लक्ष्य तय किया है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके। एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस) और अनाज (खासकर मक्का) का इस्तेमाल होता है। चीनी के दाम बढ़ते ही आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के डायवर्जन ने बाजार में चीनी की उपलब्धता घटा दी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार करीब 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ना एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ, जिससे यह बहस और तेज हो गई।

सरकार का जवाब: एथेनॉल मुख्य वजह नहीं

सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि हालिया कीमतों में उछाल के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब गन्ने की बजाय अनाज, खासकर मक्के से आता है। सरकार का यह भी कहना है कि अतिरिक्त चीनी का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, जिससे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने की क्षमता बेहतर होती है।

तो सवाल यह है — सरकार से चूक कहां हुई?

Sugar Price Hike सरकार भले ही एथेनॉल को कीमतों की मुख्य वजह मानने से इनकार करती हो, लेकिन कई कृषि व चीनी उद्योग विशेषज्ञ अलग राय रखते हैं। उनका तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने E20 लक्ष्य को तेजी से पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में डिस्टिलरी क्षमता को मंजूरी दी और गन्ने के रस व शीरे से एथेनॉल बनाने पर लगी मात्रा की सीमाएं भी हटाईं। आलोचकों के अनुसार इससे मिलों के लिए चीनी बेचने के बजाय एथेनॉल बनाना ज्यादा मुनाफे का सौदा बन गया, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्ध चीनी का हिस्सा घटा। दूसरी ओर, सरकार और उसके समर्थकों का कहना है कि उत्पादन अनुमान से कम रहना, मौसम की मार और वैश्विक कमी ही असली वजहें हैं, और एथेनॉल नीति को इसके लिए दोष देना जल्दबाजी होगी। यह बहस आने वाले समय में भी जारी रह सकती है, क्योंकि दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क और आंकड़े हैं।

सरकार ने उठाए क्या कदम?

कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए थोक कारोबारियों के स्टॉक की सीमा तय करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है।

आम आदमी की जेब पर क्या असर?

चीनी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू बजट, मिठाई और कन्फेक्शनरी उद्योग, चाय-कॉफी की लागत और त्योहारी सीजन की खरीदारी पर पड़ रहा है। ऐसे समय में जब देश में महंगाई पहले से आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है, चीनी के दाम में यह उछाल आम उपभोक्ता के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

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Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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