Bittu Tabahi River Cleaning मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में रहने वाले 20 साल के BSc छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जानते हैं, इन दिनों अपनी एक अनोखी मुहिम की वजह से देशभर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। बिना किसी सरकारी मदद, बिना बजट और बिना किसी बड़ी टीम के, इस युवक ने अकेले दम पर शहर की प्रदूषित अजनार नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया और उसमें कामयाब भी रहे।
कहानी की शुरुआत कैसे हुई
बात 26 जनवरी 2026 यानी गणतंत्र दिवस की है। बिट्टू की नजर ब्यावरा के एक स्थानीय मंदिर के पास से गुजरने वाली अजनार नदी पर पड़ी। नदी की हालत देखकर वह हैरान रह गए। पानी में जगह-जगह प्लास्टिक और कचरा तैर रहा था, सतह पर जलीय काई फैली हुई थी और शहर के नालों का गंदा पानी भी सीधे नदी में मिल रहा था। जो नदी कभी शहर की खूबसूरती का हिस्सा हुआ करती थी, वह अब कूड़ेदान जैसी नजर आने लगी थी। इसी दिन बिट्टू ने फैसला लिया कि वह इस नदी को साफ करेंगे।
दोस्तों ने साथ छोड़ा, फिर भी नहीं रुके
शुरुआत में बिट्टू के कुछ दोस्त भी उनके साथ सफाई अभियान में जुड़े, लेकिन गंदगी, बदबू और लगातार मेहनत के आगे धीरे-धीरे सब पीछे हटते गए। बिट्टू ने हार नहीं मानी और अकेले ही अभियान जारी रखा। कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद वह रोज दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक नदी की सफाई में जुट जाते। उनके लिए यह कोई एक दिन का सोशल मीडिया स्टंट नहीं, बल्कि रोज की जिम्मेदारी बन गई थी।
अपनी जेब से खर्च किए करीब 30 हजार रुपये
बिट्टू ने इस काम के लिए किसी संस्था या सरकारी योजना का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च कर सफाई के लिए जरूरी औजार, तसले और डस्टबिन जैसी चीजें खरीदीं। शुरुआत में उनके पास न दस्ताने थे, न बूट, और उन्हें तैरना भी नहीं आता था। इसके बावजूद वह गंदे पानी में उतरकर सफाई करते रहे, जिससे उनके हाथों में संक्रमण भी हो गया, लेकिन उन्होंने अभियान नहीं छोड़ा।
वीडियो वायरल हुआ, लोगों ने उड़ाया मजाक
जब बिट्टू ने अपनी सफाई मुहिम के वीडियो सोशल मीडिया पर डालना शुरू किया, तो शुरुआत में उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उन्हें ताने दिए और आरोप लगाया कि वह सिर्फ लोकप्रियता के लिए यह सब कर रहे हैं। बिट्टू ने इन बातों का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि नदी की बदली हुई तस्वीर से दिया। उन्होंने सफाई से पहले और बाद की तुलना वाला वीडियो शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो गया और लोगों की सोच बदलने लगी।
आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ
बिट्टू की मेहनत की चर्चा उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक भी पहुंची। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस युवक के जज्बे की सराहना करते हुए एक पोस्ट शेयर की, जिसके बाद बिट्टू के काम को और बड़ा मंच मिला और उनकी मुहिम देशभर में चर्चा का विषय बन गई। स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका ने भी अब इस दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
बिट्टू की कहानी से क्या सीख मिलती है
बिट्टू तबाही की कहानी यह साबित करती है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े बजट, बड़ी मशीनों या बड़ी टीम की जरूरत नहीं होती। अगर इरादा मजबूत हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी बड़ा फर्क ला सकता है। उनकी मेहनत ने न सिर्फ एक नदी को नया जीवन दिया, बल्कि हजारों लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराया।
युवाओं के लिए प्रेरणा और अवसर
बिट्टू जैसी कहानियां बताती हैं कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में युवाओं के लिए स्वयंसेवा से लेकर करियर तक कई रास्ते खुले हैं। पर्यावरण एनजीओ और सरकारी विभागों में समय-समय पर वालंटियर व नौकरी के अवसर निकलते रहते हैं, इच्छुक युवा संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें।
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