Nepal Flood 2026: आखिर क्यों आई इतनी भीषण बाढ़? हिमालय के ग्लेशियर इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं

🔄 28 August 2026 ⏱ 1 मिनट में पढ़ें 👁 112 views
Nepal Flood 2026: आखिर क्यों आई इतनी भीषण बाढ़? हिमालय के ग्लेशियर इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं

Nepal Flood 2026 अगस्त 2026 को नेपाल और तिब्बत (चीन) की सीमा से सटे इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के नुवाकोट, रसुवा और आसपास के जिलों में त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में अचानक आई इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों अब भी लापता हैं। सैकड़ों विदेशी पर्यटक भी इसकी चपेट में आए हैं। आइए जानते हैं कि आखिर इस भीषण बाढ़ के पीछे मुख्य कारण क्या हैं और हिमालय के ग्लेशियर आखिर इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं।

नेपाल बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?

वैज्ञानिकों के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, यह बाढ़ किसी सामान्य मानसूनी बारिश की वजह से नहीं, बल्कि नेपाल-चीन सीमा पर लांगटांग लिरुंग पर्वत क्षेत्र में हुए एक बड़े ग्लेशियर टूटने (ग्लेशियर कोलैप्स) और उसके बाद हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की वजह से हुई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्था USGS के मुताबिक इस घटना से पैदा हुए भूकंपीय तरंगों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर करीब 5.2 मापी गई, जो शुरुआत में 4.4 तीव्रता के भूकंप के तौर पर दर्ज हुई थी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब बर्फ और चट्टानों का यह विशाल हिस्सा तेज रफ्तार से नीचे गिरा, तो उससे पैदा हुई भारी ऊर्जा ने आसपास की बर्फ को और तेजी से पिघलाया। इससे बना पानी, मलबा और बर्फ मिलकर एक विशाल सैलाब के रूप में नीचे घाटी की ओर बहा, जिसने रास्ते में आने वाले गांवों, पुलों, सड़कों और घरों को बहा दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार बाढ़ का पानी करीब 40 से 50 मीटर तक ऊंचा उठा और यह करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहा।

क्या ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़?

शुरुआत में कुछ नेपाली अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि यह एक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी हिमानी झील के अचानक फटने से आई बाढ़ हो सकती है। हिमालय क्षेत्र में सैकड़ों ऐसी झीलें हैं जो पिघलते ग्लेशियरों के पानी से बनती हैं और प्राकृतिक बर्फ या मलबे के बांध के सहारे टिकी रहती हैं। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल, भारत और तिब्बत में करीब 3,624 हिमानी झीलें हैं, जिनमें से 47 को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। हालांकि भूविज्ञानियों के अनुसार इस बार की घटना पारंपरिक GLOF से अलग और कहीं ज्यादा जटिल घटना प्रतीत होती है, जिसमें ग्लेशियर टूटने के साथ-साथ नदी के अस्थायी रूप से अवरुद्ध होने और फिर उसके टूटने की भी भूमिका रही हो सकती है।

हिमालय के ग्लेशियर इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं?

वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के पीछे मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) जिम्मेदार बताया जा रहा है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं –

1. वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि

ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण धरती का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। हिमालय जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह तापमान वृद्धि वैश्विक औसत से भी अधिक तेजी से महसूस की जा रही है, जिससे बर्फ और ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं।

2. ब्लैक कार्बन और प्रदूषण

वाहनों, फैक्ट्रियों और जंगल की आग से निकलने वाला ब्लैक कार्बन (कालिख) जब बर्फ पर जमता है, तो वह सूर्य की रोशनी को कम परावर्तित कर पाता है और गर्मी सोखने लगता है, जिससे बर्फ के पिघलने की रफ्तार और बढ़ जाती है।

3. बर्फ और चट्टानों की अस्थिरता

तापमान बढ़ने से ग्लेशियरों के नीचे और आसपास की चट्टानें व मिट्टी कमजोर होती जा रही हैं, जिससे भूस्खलन और हिमखंड टूटने (आइस एवलांच) की घटनाएं बढ़ रही हैं – जैसा कि इस बार नेपाल में देखने को मिला।

4. लंबे समय से जारी शोध के निष्कर्ष

वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार बीते कुछ दशकों में हिमालय के ग्लेशियर पिछली कई सदियों के औसत से करीब 10 गुना तेज रफ्तार से पिघल रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक यदि मौजूदा रफ्तार से तापमान बढ़ता रहा, तो सदी के अंत तक हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियर अपने बर्फ के भंडार का 75 प्रतिशत तक हिस्सा खो सकते हैं।

आगे क्या खतरा है?

विशेषज्ञों की मानें तो नेपाल जैसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं, क्योंकि हिमालय क्षेत्र की अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिक फिलहाल सटीक कारणों की पुष्टि के लिए आगे की जांच और सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण में जुटे हैं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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updatetimesin
Update Times के वरिष्ठ पत्रकार।
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