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Money Laundering :क्या होता है मनी लॉन्ड्रिंग जिसके शिकंजे में फसे है केजरीवाल जैसे नेता भी

Money Laundering

Money Laundering :क्या होता है मनी लॉन्ड्रिंग जिसके शिकंजे में फसे है केजरीवाल जैसे नेता भी

Money Laundering: क्या होता है मनी लॉन्ड्रिंग मामला जिसके शिकंजे में केजरीवाल से लेकर कई टीवी सेलेब्रिटीस फसी हुई है और मनी लॉन्ड्रिंग को सुर्खिया में ला दिया है । बता दे इसी केस में अरविन्द केजरीवाल जी भी इस समय जेल में बंद हैं। ईडी ने पूछताछ के लिए तलब किया है।

-भैय्या-इस-राखी-अपनी-बहनो-को-देगे-नई-सौगात-19-1024x576 Money Laundering :क्या होता है मनी लॉन्ड्रिंग जिसके शिकंजे में फसे है केजरीवाल जैसे नेता भी
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क्या होता है मनी लॉन्ड्रिंग

मनी लॉन्ड्रिंग को आसान भाषा में समझा जाये तो मनी लॉन्ड्रिंग एक ऐसी अवैध प्रक्रिया है जिसमें अपराधिक गतिविधियों से प्राप्त हुई धनराशि को कानूनी स्रोत से प्राप्त हुआ दिखाने का प्रयास किया जाता है। इस प्रक्रिया में सामान्यत: धनराशि को विभिन्न लेन-देन या वित्तीय स्थानांतरणों के माध्यम से एक ऐसे रूप में संशोधित किया जाता है कि इसकी मूल उत्पत्ति को छिपाया जा सके। यह अपराधिक प्रक्रिया आमतौर पर धनराशि के ब्लैक मार्केट पर उपयोग होने वाले धनराशि को सफेद मार्केट (यानी कानूनी धन) में बदलने के लिए की जाती है।

मनी लॉन्ड्रिंग की उत्पत्ति कैसे हुई

मनी लॉन्ड्रिंग शब्द संयुक्त राज्य अमेरिका से आया है। इसे वहां के माफिया लोगों ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपराधिक तरीके से एकत्र किए गए धन को कानूनी रूप से सही ठहराने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया, जिसे बाद में ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ शब्द दिया गया। नेता, नौकरशाह और बड़े बड़े कारोबारी इस गंदे खेल में शामिल होते हैं। वे अपने गलत तरीके से कमाए गए धन को अपनी मेहनत की कमाई बताने के लिए सफाई करते हैं। इस धन का इस्तेमाल फिर गलत कामों में किया जाता है क्योंकि यह अपराधिक रूप से एकत्र किया गया है।

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Money Laundering Act

भारतीय कानून में मनी लॉन्ड्रिंग को नियंत्रित करने और उसकी रोकथाम के लिए “प्रीवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002” (Prevention of Money Laundering Act, 2002 – PMLA) है। यह कानून भारत में मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है और ऐसे वित्तीय संविदा इकाई (Financial Intelligence Unit – FIU) की स्थापना के लिए प्रावधान करता है जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी इकट्ठा करती और विश्लेषित करती है।

PMLA के तहत, मनी लॉन्ड्रिंग के द्वारा प्राप्त धनराशि को जब्त करने और संपत्तियों को जब्त या बरामद करने की प्रक्रिया को विस्तार से व्यवस्थित किया गया है।

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मनी लॉन्ड्रिंग: अपराधिक धन की सफाई

मनी लॉन्ड्रिंग एक अपराधिक प्रक्रिया है जिसमें गलत तरीकों से एकत्र किए गए धन को इस रूप में निवेश किया जाता है ताकि सरकार को इसके असली स्रोत का पता न चले। मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले को “लॉन्डरर” कहा जाता है और वे बेहद चालाक होते हैं। वे बड़े-बड़े सीए से मदद लेते हैं जो धन को कहां, कैसे और किसके नाम पर निवेश करना है यह तय करते हैं। सीए इसके लिए फर्जी दस्तावेज़ तैयार करते हैं ताकि सरकार को पकड़ ना सके। कई बार ध्यान न देने के कारण ये लॉन्डरर पकड़ भी जाते हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियां बनाई जाती हैं, जो कि बड़ी दिखने वाली कंपनियों को दिखाई देती हैं, लेकिन वास्तव में ये कागज़ पर ही होती हैं और कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं करती हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग के 3 स्टेप:

  1. स्थापना (Placement): पहला स्टेप होता है स्थापना, जिसमें अपराधिक धन को विभिन्न तरीकों से वित्तीय प्रणालियों में जमा किया जाता है। यह धन को बैंक जमा, नकद जमा, या अन्य वित्तीय संस्थाओं में जमा करके किया जा सकता है।
  2. लेयरिंग (Layering): दूसरा स्टेप है लेयरिंग, जिसमें धन को गुमराह करने के लिए विभिन्न वित्तीय लेन-देन किए जाते हैं। यह विभिन्न बैंक खातों में धन के स्थानांतरण, लोन्स, और अन्य वित्तीय लेन-देनों को शामिल करता है।
  3. इंटीग्रेशन (Integration): तीसरा स्टेप है इंटीग्रेशन, जिसमें गुप्त रूप से धन को वापस लाया जाता है ताकि यह कानूनी रूप से व्यवस्थित लगे। इस स्टेप में धन को कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत बैंक खातों में जमा किया जाता है और इसे व्यापारिक लेन-देनों में शामिल किया जाता है

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